How to get pregnant ? Ancient Indian KamaSutra : गर्भधारण के आसान उपाय

How to get pregnant ? Ancient Indian KamaSutra : गर्भधारण के आसान उपाय

गर्भधारण का उचित समय, गर्भधारण की प्रक्रिया
जब तक Pregnancy के प्रयास में कम से कम एक वर्ष न हो जाए। तब तक 30 वर्ष से कम उम्र वाली स्वस्थ महिला को गर्भधारण की चिन्ता नहीं करनी चाहिए। 30 वर्ष की वह महिला जो पिछले छह माह से (Pregnant) गर्भवती होने का प्रयास कर रही हो, गर्भ धारण न होने पर जल्द से जल्द डॉक्टर से परामर्श ले। तीस की उम्र के बाद गर्भधारण की सम्भावनाएं तेजी से घटने लगती है। उचित समय पर और पूर्ण (Fertility)प्रजनन शक्ति (प्रजनन क्षमता बढ़ाने के उपाय) के लिए अपनी जाँच करवा लेना महत्वपूर्ण होता है। (Infertility) बांझपन का इलाज कराने वाले दो तिहाई दम्पत्ति संतान पाने के उपाय में सफल हो जाते हैं। आज यह समस्या तेज़ी से फ़ैल रही है तथा अब लोग इस बीमारी के उपचार के लिए अंग्रेज़ी दवाओं की तुलना में आयुर्वेदिक दवाई की ओर मुड़ रहे है क्योंकि कृत्रिम जीवन शैली में उनकी बीमारियों का सफल और सुरक्षित इलाज केवल आयुर्वेदिक दवाइयां हैं क्योंकि इन दवाईयों का कोई भी सह प्रभाव नही होता है यह दवाइयां हमारे स्वस्थ के लिये बहुत अधिक सुरक्षित होती हैं
गर्भधारण करने का तरीका

अब आपको एक डॉक्टर के कार्यालय में शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं है और किसी भी महंगा नुस्खे खरीदने की आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेदिक की जड़ी बूटी आपके शरीर को बेहतर गुणवत्ता के शुक्राणु बनाने में मदद करती है ! इसका कोई बुरा प्रभाव नहीं है! यह एक पूरी तरह से प्राकृतिक उपचार है निल शुक्राणु का उपचार, शुक्राणु बढ़ाने वाला अचूक नुस्ख़ा।
एक वर्ष तक कोशिश करते रहने के बाद अगर गर्भधारण नहीं होता तो उसे बांझपन, (A Disease Of The Reproductive System) कहते हैं। यह केवल स्त्री के कारण नहीं होती। केवल एक तिहाई मामलों में Infertility स्त्री के कारण होती है। दूसरे एक तिहाई में पुरूष के कारण होती है। शेष एक तिहाई में स्त्री और पुरुष के मिले जुले कारणों से या अज्ञात कारणों से होती है।

महिला के गर्भधारण में समस्या

बांझपन, प्रजनन प्रणाली की एक बीमारी है जिसके कारण किसी महिला के गर्भधारण में समस्या (विकृति)(Deformities In Pregnancies) आ जाती है। गर्भधारण एक जटिल प्रक्रिया है जो कई बातों पर निर्भर करती है- पुरुष द्वारा स्वस्थ शुक्राणु तथा महिला द्वारा स्वस्थ अंडों का उत्पादन, अबाधित गर्भ नलिकाएं (Ducts Unobstructed Womb) ताकि शुक्राणु बिना किसी रुकावट के अंडों तक पहुंच सके, मिलने के बाद अंडों को निषेचित करने की शुक्राणु की क्षमता (The Ability Of Sperm To Fertilize Eggs), निषेचित अंडे की महिला के गर्भाशय में स्थापित होने की क्षमता(The Installed Capacity Of The Fertilized Egg In The Uterus Of The Woman.) तथा गर्भाशय की स्थिति।अंत में गर्भ के पूरी अवधि तक जारी रखने के लिए गर्भाशय का स्वस्थ होना और भ्रूण के विकास के लिए महिला के हारमोन का अनुकूल होना जरूरी है। इनमें से किसी एक में विकृति आने का परिणाम बांझपन हो सकता है।

बांझपन के कारण, बांझपन क्यों होता है ?

पुरुषों में प्रजनन क्षमता में कमी का सबसे सामान्य कारण शुक्राणु का कम या नहीं होना है। कभी-कभी शुक्राणु का गड़बड़ होना या अंडों तक पहुंचने से पहले ही उसका मर जाना भी एक कारण होता है। महिलाओं में बांझपन का सबसे सामान्य कारण मासिक-चक्र में गड़बड़ी है। इसके अलावा गर्भ-नलिकाओं का बंद होना, गर्भाशय में विकृति या जननांग में गड़बड़ी के कारण भी अक्सर गर्भपात हो सकता है।
बाँझपन के मुख्य कारण Why You’re Not Getting Pregnant?

पुरूष के सम्पूर्ण स्वास्थ्य एवं जीवन शैली का प्रभाव शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ता है। जिन चीज़ों से शुक्राणुओं की संख्या और गुणवत्ता घटती है !

अंडे की गुणवत्ता – Egg Quality
अवरुद्ध अण्डवाही ट्यूबें – Blocked Eggs Tubes.
असामान्य हार्मोन के स्तर – Abnormal Hormone Levels
जीवन शैली – Lifestyle
यौन संचारित रोग – Sexually Transmitted Diseases (STD)
मोटापा – Obesity
शुक्राणु बनने की समस्य – बहुत कम शुक्राणू या बिलकुल नहीं।
मदिरा, ड्रग्स एवं सिगरेट पीना – Alcohol, Drugs And Cigarette Smoking
वातावरण का विषैलापन जैसे कीटनाशक दवाएं – Virulence Of The Environment, Such As Pesticides

गर्भवती कैसे हों ? गर्भधारण करने का तरीका,

जब स्त्री को महावारी (Menstruation) शुरू हो तब है। 4 दिन सब से अलग रह कर कोई भी काम काज ना करें और पूरी तरीके से आराम करें। मन से खुश रहे। पति से सहवास न करे। विचार में शुद्धता रखें, महावारी खत्म होने पर अच्छे सुगंधित उबटन से लगाकर स्नान करें। सबसे पहले अपने पति को देखे या शीशे में खुद को देखे। इन दिनों में स्त्री को खुश सात्विक अच्छे विचारों से युक्त रहना चाहिए। गर्भाधान के समय (At The Time Of Conception.) स्त्री का मन जिस प्रकार के विचारों वाला होता है और जिस तरफ आकर्षित रहता है उसी प्रकार की संतान को जन्म (Giving Birth To A Child) देती है। गर्भाधान (Fertilization)और गर्भकाल के दौरान (During Pregnancy), स्त्री जैसी भावना और विचारधारा रखती है उसी के अनुरूप संतान के मन स्वभाव और संस्कारों का निर्माण होता है। इसलिए पति पत्नी को गर्भाधान के समय अपनी मानसिक स्थिति अच्छे विचार कृतीयुक्त और सात्विक रहना चाहिए।

गर्भाधान के लिए उत्तम समय कौन-सा ?

पुत्र प्राप्ति की इच्छा से किया जानेवाला गर्भाधान (Impregnation) माहवारी की 8वीं 10वीं और 12वीं रात्रि को ही किया जाना चाहिए। जिस दिन मासिक धर्म शुरु हो उस दिन व रात को प्रथम मानकर गिनती करनी चाहिए। छठी और आठवीं सम तारीख शुभरात्रि पुत्र प्राप्ति के लिए और विषम तारीख पुत्री प्राप्ति के लिए उत्तम होती है। इसलिए आप जैसी संतान की इच्छा (Willingness Child) हो उसी तारीख को गर्भाधान करें।

साथ ही साथ आप कुछ गर्भाधान के उपाय भी करे।

दालचीनी: Cinnamon

वह पुरुष जो बच्चा पैदा करने में असमर्थ (Unable To Have A Child) होता है, वह रोजाना सोते समय दो बड़े चम्मच दालचीनी का चूर्ण (Cinnamon Powder) ले तो वीर्य में वृद्धि होती है। और उसकी यह समस्या दूर हो जाएगी।

जिस महिला को गर्भाधान (Woman Conception) ही नहीं होता है। वह चुटकी भर दालचीनी पावडर (Cinnamon Powder) एक चम्मच शहद (Honey) में मिलाकर अपने मसूढ़ों (Gums) में दिन में कई बार लगायें। थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा। एक दम्पत्ति को 14 वर्ष से संतान नहीं हुई थी, महिला ने इस विधि से मसूढ़ों पर दालचीनी, शहद लगाया, वह कुछ ही महीनों में गर्भवती (Pregnant) हो गई और उसने पूर्ण विकसित दो सुन्दर जुड़वा बच्चों का जन्म (The Birth Of Twins) दिया।

असगंध: Ashwagndha Powder गर्भवती कैसे बनें

नागकेसर, असंगध और गोरोचन इन तीनों को समान मात्रा में बराबर मात्रा में लेकर पीस-छान लें। इसे शीतल जल के साथ सेवन करें तो स्त्री बहुत जल्दी गर्भवती हो जाती है। (How To Get Pregnant In Hindi.)

असगंध का चूर्ण 50 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर कपडे से छान कर रख लें। जब माहवारी बंद हो जाए तब स्त्री स्नान करके शुद्ध हो जाए, तो 10 ग्राम असगंध का चूर्ण सेवन घी के साथ करें। उसके बाद पुरुष के साथ रमण (Sex) करें तो इससे बांझपन दूर होकर महिला गर्भवती हो जाएगी।

तुलसी: Basil माहवारी नियमित करने के उपाय

यदि किसी महिला को माहवारी नियमित रूप से सही मात्रा में होता होता हो, परन्तु वह Pregnant नहीं नहीं हो पा रही हो तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज (Seed Of Tulsi) चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है। (Healthy Uterus, It Is Worthy Of Support As Pregnancy.)

तेजपात: Cinnamon Powder प्रेगनेंट होने के टिप्स

गर्भाशय की कमजोरी (ढीलापन) की वजह से यदि गर्भाधान न हो रहा तो तेजपत्ता का चूर्ण 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की कमजोरी दूर हो जाती है (The Weakness Of The Uterus Dissolves Away.) तथा स्त्री प्रेग्नेंट होने के योग्य बन जाती है। (Woman Are Eligible To Be Pregnant.)

गर्भपात से बचने के उपाय, गर्भपात के घरेलू उपचार, गर्भ सम्बन्धी दोष

कभी-कभी किसी स्त्री को प्रेग्नेंट नहीं हो पाती है और बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को गर्भ रुकने के बाद गर्भस्राव (Miscarriage) हो जाता है। तेजपात दोनों ही समस्याओं को खत्म करता है। तेजपात का पाउडर चौथाई चम्मच की मात्रा में तीन बार पानी से नियमित लेना चाहिए। कुछ महीने तेजपात की फंकी लेने से गर्भाशय की कमजोरी दूर होकर गर्भाधान संस्कार के योग्य हो जाता है जिन स्त्रियों को गर्भस्राव होता है, उन्हें प्रेग्नेंट होने के बाद कुछ महीने तेजपत्ते के पाउडर की फंकी लेनी चाहिए। इस तरह तेजपत्ते से गर्भ सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं और स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।
पीपल: Peepal,

पीपल वृक्ष की जटा का चूर्ण 5 ग्राम मासिक-धर्म के चौथे, पांचवे, छठे और सातवे दिन सुबह नहाकर बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्यापन मिटकर गर्भवती होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।

पीपल की डोडी कच्ची 250 ग्राम, शक्कर 250 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें। पीरियड के बाद 10 ग्राम चूर्ण मिश्री और दूध के साथ सुबह-शाम देना चाहिए। इसे 10 दिनों तक लगातार सेवन करने से लाभ मिलता है।
पीपल के सूखे फलों का चूर्ण कच्चे दूध के साथ आधा चम्मच की मात्रा में, मासिक-धर्म शुरू होने के 5 दिन से 2 हफ्ते तक सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से बांझपन दूर होगा। यदि लाभ न हो तो आप अगले महीने भी यह प्रयोग जारी कर सकते हैं।

गर्भधारण के आसान उपाय, गर्भधारण कैसे करे
लगभग 250 ग्राम पीपल के पेड़ की सूखी पिसी हुई जड़ों में 250 ग्राम बूरा मिलाकर पति व पत्त्नी दोनों, जिस दिन से पत्त्नी का पीरियड शुरू हो, 4-4 चम्मच गर्म दूध में रोजाना 11 दिन तक फंकी लें। जिस दिन यह मिश्रण समाप्त हो, उसी रात से 12 बजे के बाद रोजाना संभोग (सेक्स ) करने से बांझपन की स्थिति में भी गर्भधारण की संम्भावना बढ़ जाती है।
पीपल के सूखे फलों के 1-2 ग्राम चूर्ण की फंकी कच्चे दूध के साथ पीरियड के खत्म होने बाद 14 दिन तक देने से औरत का बांझपन मिट जाता है।
गर्भाधान के दिन से(From Conception.) ही चावल, खीर, दूध, भात, रात को सोते समय शतावरी का चूर्ण दूध के साथ लेना चाहिए।
सुबह मक्खन और मिश्री मिलाकर एक एक चम्मच पीसी काली मिर्च मिलाकर चाटना चाहिए और ऊपर से कच्चा नारियल और सौंफ खाना चाहिए।
यह प्रयोग पूरे प्रेगनेंसी में जरूर करना चाहिए। जो गर्भवती स्त्री पूरे 9 महीने तक नियमपूर्व रोजाना सुबह और शाम मक्खन मिश्री कालीमिर्च कच्चा नारियल और सौंफ का सेवन करती है। वह निश्चित ही बहुत ही गोरे और स्वस्थ संतान को जन्म देती है। भले ही उसका खुद का रंग गोरा ना हो। आयुर्वेद में पूरे 9 महीनों में करने योग्य विधि विधान बताया है उसका पालन करना चाहिए .

गर्भावस्था में सावधानियां :

उस प्रकार के व्यायाम भी नहीं करने चाहिए जो शक्ति से बाहर हो।
मल-मूत्र, प्यास और भूख के इच्छाओं को नहीं रोकना चाहिए।
अधिक ठन्डे , गर्म, तीक्ष्ण, गरिष्ठ आहार के सेवन से अनेक रोग उत्पन्न होते हैं। गर्भधारण की इच्छुक नारियों को उसे अपथ्य समझना चाहिए।
अधिक भोजन तथा अल्प भोजन भी स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं होता है।
दाम्पत्य जीवन को प्रसन्नता से चलाना चाहिए। शोक, क्रोध चिंता आदि नहीं करनी चाहिए। अधिक रोना, हंसना, कूढ़ना, ईर्ष्या, रखना भी स्वयं के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है और ऐसे भी कारण जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रतिकूल हो उन्हें त्याग देना ही बेहतर होता है।

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